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दान

सेवा ही सच्ची पूजा हैंl
नर ही नारायण का रूप हैंl
सामाजिक समरसता ही सनातन धर्म का असली प्रयाय हैंl

सबसे ज्यादा खुश वो रहते है, जो खुद के अलावा अन्यों को महत्व देते हैं।

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श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल (जसोलधाम) परिसर में श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री काला – गौरा भैरूजी एवं श्री खेतलाजी मंदिरों का प्रशासनिक निकाय है तथा जसोलधाम इनके विकास के लिए सदैव समर्पित है।